तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग।।4।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग।।4।।
RCM 5.4.10
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग।।4।।
RCM 5.4.10
तूल न ताहि सकल मिलि जो सुख लव सतसंग।।4।।