बिकल होसि तैं कपि कें मारे। तब जानेसु निसिचर संघारे।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बिकल होसि तैं कपि कें मारे। तब जानेसु निसिचर संघारे।।
RCM 5.4.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बिकल होसि तैं कपि कें मारे। तब जानेसु निसिचर संघारे।।
RCM 5.4.7
बिकल होसि तैं कपि कें मारे। तब जानेसु निसिचर संघारे।।