पुनि संभारि उठि सो लंका। जोरि पानि कर बिनय संसका।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
पुनि संभारि उठि सो लंका। जोरि पानि कर बिनय संसका।।
RCM 5.4.5
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
पुनि संभारि उठि सो लंका। जोरि पानि कर बिनय संसका।।
RCM 5.4.5
पुनि संभारि उठि सो लंका। जोरि पानि कर बिनय संसका।।