मुठिका एक महा कपि हनी। रुधिर बमत धरनीं ढनमनी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
मुठिका एक महा कपि हनी। रुधिर बमत धरनीं ढनमनी।।
RCM 5.4.4
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
मुठिका एक महा कपि हनी। रुधिर बमत धरनीं ढनमनी।।
RCM 5.4.4
मुठिका एक महा कपि हनी। रुधिर बमत धरनीं ढनमनी।।