मसक समान रूप कपि धरी। लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
मसक समान रूप कपि धरी। लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी।।
RCM 5.4.1
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
मसक समान रूप कपि धरी। लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी।।
RCM 5.4.1
मसक समान रूप कपि धरी। लंकहि चलेउ सुमिरि नरहरी।।