उमा न कछु कपि कै अधिकाई। प्रभु प्रताप जो कालहि खाई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
उमा न कछु कपि कै अधिकाई। प्रभु प्रताप जो कालहि खाई।।
RCM 5.3.9
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
उमा न कछु कपि कै अधिकाई। प्रभु प्रताप जो कालहि खाई।।
RCM 5.3.9
उमा न कछु कपि कै अधिकाई। प्रभु प्रताप जो कालहि खाई।।