नाना तरु फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नाना तरु फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए।।
RCM 5.3.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
नाना तरु फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए।।
RCM 5.3.7
नाना तरु फल फूल सुहाए। खग मृग बृंद देखि मन भाए।।