गहइ छाहँ सक सो न उड़ाई। एहि बिधि सदा गगनचर खाई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
गहइ छाहँ सक सो न उड़ाई। एहि बिधि सदा गगनचर खाई।।
RCM 5.3.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
गहइ छाहँ सक सो न उड़ाई। एहि बिधि सदा गगनचर खाई।।
RCM 5.3.3
गहइ छाहँ सक सो न उड़ाई। एहि बिधि सदा गगनचर खाई।।