निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई। करि माया नभु के खग गहई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई। करि माया नभु के खग गहई।।
RCM 5.3.1
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई। करि माया नभु के खग गहई।।
RCM 5.3.1
निसिचरि एक सिंधु महुँ रहई। करि माया नभु के खग गहई।।