जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता। चलेउ सो गा पाताल तुरंता।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता। चलेउ सो गा पाताल तुरंता।।
RCM 5.1.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता। चलेउ सो गा पाताल तुरंता।।
RCM 5.1.7
जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता। चलेउ सो गा पाताल तुरंता।।