बार बार रघुबीर सँभारी। तरकेउ पवनतनय बल भारी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बार बार रघुबीर सँभारी। तरकेउ पवनतनय बल भारी।।
RCM 5.1.6
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बार बार रघुबीर सँभारी। तरकेउ पवनतनय बल भारी।।
RCM 5.1.6
बार बार रघुबीर सँभारी। तरकेउ पवनतनय बल भारी।।