चितवत पंथ रहेउँ दिन राती। अब प्रभु देखि जुड़ानी छाती।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
चितवत पंथ रहेउँ दिन राती। अब प्रभु देखि जुड़ानी छाती।।
RCM 3.8.3
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
चितवत पंथ रहेउँ दिन राती। अब प्रभु देखि जुड़ानी छाती।।
RCM 3.8.3
चितवत पंथ रहेउँ दिन राती। अब प्रभु देखि जुड़ानी छाती।।