तुरतहिं रुचिर रूप तेहिं पावा। देखि दुखी निज धाम पठावा।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
तुरतहिं रुचिर रूप तेहिं पावा। देखि दुखी निज धाम पठावा।।
RCM 3.7.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
तुरतहिं रुचिर रूप तेहिं पावा। देखि दुखी निज धाम पठावा।।
RCM 3.7.7
तुरतहिं रुचिर रूप तेहिं पावा। देखि दुखी निज धाम पठावा।।