बिनु श्रम नारि परम गति लहई। पतिब्रत धर्म छाड़ि छल गहई।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बिनु श्रम नारि परम गति लहई। पतिब्रत धर्म छाड़ि छल गहई।।
RCM 3.5.18
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
बिनु श्रम नारि परम गति लहई। पतिब्रत धर्म छाड़ि छल गहई।।
RCM 3.5.18
बिनु श्रम नारि परम गति लहई। पतिब्रत धर्म छाड़ि छल गहई।।