उत्तम के अस बस मन माहीं। सपनेहुँ आन पुरुष जग नाहीं।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
उत्तम के अस बस मन माहीं। सपनेहुँ आन पुरुष जग नाहीं।।
RCM 3.5.12
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
उत्तम के अस बस मन माहीं। सपनेहुँ आन पुरुष जग नाहीं।।
RCM 3.5.12
उत्तम के अस बस मन माहीं। सपनेहुँ आन पुरुष जग नाहीं।।