एकइ धर्म एक ब्रत नेमा। कायँ बचन मन पति पद प्रेमा।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
एकइ धर्म एक ब्रत नेमा। कायँ बचन मन पति पद प्रेमा।।
RCM 3.5.10
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
एकइ धर्म एक ब्रत नेमा। कायँ बचन मन पति पद प्रेमा।।
RCM 3.5.10
एकइ धर्म एक ब्रत नेमा। कायँ बचन मन पति पद प्रेमा।।