धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी।।
RCM 3.5.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी।।
RCM 3.5.7
धीरज धर्म मित्र अरु नारी। आपद काल परिखिअहिं चारी।।