करत दंडवत मुनि उर लाए। प्रेम बारि द्वौ जन अन्हवाए।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
करत दंडवत मुनि उर लाए। प्रेम बारि द्वौ जन अन्हवाए।।
RCM 3.3.6
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
करत दंडवत मुनि उर लाए। प्रेम बारि द्वौ जन अन्हवाए।।
RCM 3.3.6
करत दंडवत मुनि उर लाए। प्रेम बारि द्वौ जन अन्हवाए।।