कीन्ह मोह बस द्रोह जद्यपि तेहि कर बध उचित।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
कीन्ह मोह बस द्रोह जद्यपि तेहि कर बध उचित।
RCM 3.2.15
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
कीन्ह मोह बस द्रोह जद्यपि तेहि कर बध उचित।
RCM 3.2.15
कीन्ह मोह बस द्रोह जद्यपि तेहि कर बध उचित।