पठवा तुरत राम पहिं ताही। कहेसि पुकारि प्रनत हित पाही।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
पठवा तुरत राम पहिं ताही। कहेसि पुकारि प्रनत हित पाही।।
RCM 3.2.10
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
पठवा तुरत राम पहिं ताही। कहेसि पुकारि प्रनत हित पाही।।
RCM 3.2.10
पठवा तुरत राम पहिं ताही। कहेसि पुकारि प्रनत हित पाही।।