मित्र करइ सत रिपु कै करनी। ता कहँ बिबुधनदी बैतरनी।।
Ramcharitmanas
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
मित्र करइ सत रिपु कै करनी। ता कहँ बिबुधनदी बैतरनी।।
RCM 3.2.7
श्रीरामचरितमानस
मूल श्लोकः
मित्र करइ सत रिपु कै करनी। ता कहँ बिबुधनदी बैतरनी।।
RCM 3.2.7
मित्र करइ सत रिपु कै करनी। ता कहँ बिबुधनदी बैतरनी।।