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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

पंडित सेती कहि रहे, कह्यां न मानै कोइ। ओ अगाध एका कहै, भारी अचिरज होइ॥

Kabir 9.1

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

―मैं यदि पण्डितो से उस परमात्मा के अद्भुत स्वरुप का वर्णन करता हूँ तो ये उसका विश्वास ही नही करते। और यदि मैं उनसे यह कहता है कि ब्रह्म असीम, अगाध, और एक है तो सभी पण्डित आश्चर्य करते हैं।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

―सेति=से।