मया के सागर मे गानागनि लगी तो पाया कि महयक तरन विनष्ट हो गये और लारमा रूपी नर्दश्थ गया के जल को धोद कर अलग हो गई।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
पारगी मंहि प्रजली, भई अप्रबल आगि। वहती खलिता रह गई,मंल्ल रहे जल त्यागि॥
Kabir 4.9
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
माया रूपी जल मे गनाग्नि लगी तो माया के साहयक तरव रुपयनि हो गये और लरमा माया से पुष्क हो गइ।
Padārtha — Word-meaning
प्रयगि= प्रग्यश्ति हुई। सप्रबल= अत्यन्थ् प्रयल। मसिला=नहीं