गुरु ने ज्ञान को अग्नि प्रज्वलित की और शिष्य विरह (ज्ञान विगह)को अग्नि मे जल गया। तिनके के समान हल्की, पाप के भार से मुक्त आत्मा को उन्मपित हो गया और वह पूर्ण ब्रह्म से मिल कर एकाकर हो गया।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
विणका बपुड़ा ऊचरया ,गलि पुरे फै लागी ॥
Kabir 4.7
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
बिरह को अग्नि मे जल कर शिष्य् का भव सागर से उढार हो गया।
Padārtha — Word-meaning
राधा =दग्ध किया। जल्या= जला। विरहा= विरहग्नि। तिग्ग्का=तिनका। वपुडा= वपुरा=वेचारा। गलि=सहारे। पूरे= पूरग्ँ=प्रहा।