ज्ञान की अग्नि के लगते हो माया का जल और उसके सहायत तत्व विनष्ट हो गये । इस आश्चर्यजनक कृत्य को उतर दक्षिण के पण्डित देखते हो रह गय ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
अग्नि जु लागी नीर मैं, कँदू जलिया भारि । उतर दषिण के पंडिता, रहे बिचारि बिचारि ॥
Kabir 4.5
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
नीर = जल, माया का जल । कन्दू = कदँम = कोचढ । भारि = सम्पूर्ण ।