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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

अग्नि जु लागी नीर मैं, कँदू जलिया भारि । उतर दषिण के पंडिता, रहे बिचारि बिचारि ॥

Kabir 4.5

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

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ज्ञान की अग्नि के लगते हो माया का जल और उसके सहायत तत्व विनष्ट हो गये । इस आश्चर्यजनक कृत्य को उतर दक्षिण के पण्डित देखते हो रह गय ।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

नीर = जल, माया का जल । कन्दू = कदँम = कोचढ । भारि = सम्पूर्ण ।