एक अंग=एक निष्ठ होकर धरणी=स्वामी।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर देख्या एक अंग,महिम कही न जाइ। तेज पुंज पारस धरणीं,नैनू रहा समाइ॥
Kabir 4.37
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर देख्या एक अंग,महिम कही न जाइ। तेज पुंज पारस धरणीं,नैनू रहा समाइ॥
Kabir 4.37
एक अंग=एक निष्ठ होकर धरणी=स्वामी।