जिसके खोज मे मैं भटक रहा था वह अपने स्थान पर प्राप्त हो गया और जिसे मैं विलग समझता था वही अभिन्न हो गया।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
जा कारणि मैं जाइ था,सोई पाई ठौर। सोई फिरि आपण भया,जासू कहता और॥
Kabir 4.36
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
आत्मा और परमात्मा मिलकर एकाकार हो गए ।
Padārtha — Word-meaning
जा कारणि-जिसके लिए।