जब तक अहं था तब तक मैं हरि को नहीं प्राप्त कर पाया। अब तो हरि ही हैं मैं नही हूँ, जब से ह्रदय मे स्वय प्रकाश के दर्शन हुए तब से समस्त ताप और पाप नष्ट हो गए ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ—संसार सागर में हरि हीरा प्राप्त हो गया । जब मैं था तब हरि नहीं,अब हरि हैं मैं नांहि । सब अँधियारा मिटि गया जब दीपक देख्यां माहि ॥
Kabir 4.34
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
ह्रदय मे ब्रह्मानुभूति होते ही समस्त अंधकार मिट गया।
Padārtha — Word-meaning
मै=अहंमभाव ।