जब से मन में धैर्य और शान्ति स्थापित हो गई तब में हरि रूपी हीरा सम्प्राप्त हो गया। संसार सागर में खोजते खोजते हरि रूपी हीरा प्राप्त हो गया ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ—संसार सागर में भटकते-भटकते हरि रूपी हीरा प्राप्त हो गया। कबीर दिल स्यावति भया, पाया फल संम्रथ्य। सायर मांहि ढंढोलतां, हीरै पडि गया हथ्य॥
Kabir 4.33
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
स्याबित = सम्पूर्ण । ढंढोलता = खोजते हुए ।