जिन्होंने खोज की उन्हें हरि रूपी हीरा मिला और जिसने पाया उसे भली-भाँति ग्रहण किया। मन में जिह्वा में रामनाम रूपी स्वाद लग गया। मैंने तो अद्भुत रत्न प्राप्त कर लिया अब संसार में कौन भटकता फिरे।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
जिनि पाया तिनि सू गह गह्या रसनां लागी स्वादि। रतन निराला पाईया, जगत ढंडौल्या बादि॥
Kabir 4.32
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
मूगह = अच्छी तरह। गह्या = पकड़ा। ढंदौल्या = खोजा।