जब से मन में प्रभु का ध्यान हुआ, तब से मन में शान्ति स्थापित हुई। ब्रह्म तत्व की प्राप्ति हुई और तन की दशाएंँ भूल गया। समस्त ताप नष्ट हो गए और शून्य सरोवर में स्नान किया।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
तत पाया तन बीसर्या, जब मन घरिया ध्यान। तपनि गई सीतल भया, जब सुनि किया असनान॥
Kabir 4.31
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
धैर्यं के जाग्रत होते ही तत्व प्राप्त हो गया।
Padārtha — Word-meaning
तत = तत्व।