सदगुरु की कृपा से मन स्थिर हो गया और हरि की यज्ञगाथा की साधना मे मन अनुरक्त हो गया, तब से हृदय मे भगवान के दर्शन हुए।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
थिति पाई मन थिर भया, सतगुरु करी सहाइ। अनिन कथा तनि आचरी, हिरदै त्रिभुवन राइ॥
Kabir 4.28
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
जब से हरि को कथा का ध्यान किया तब से समस्त ताप नष्ट हो गए।
Padārtha — Word-meaning
थिति=शांति। अमिन=अनन्य।