कबीर दास कहते हैं कि जब से प्रभु के प्रत्यक्ष दर्शन् हुए तब से हृदय मे शन्ति का साम्राज्य स्थापित हो गाया और समस्त पाप सहज रूप से विनष्ट हो गए ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सचुपाया सुख ऊपना, अरु दिल दरिया पूरि। सकल पाप सड़जैं गये, जब जाई मिल्या हजूरि॥
Kabir 4.26
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
हुजूर के दर्शन होते ही सम्रहन पाप और अलेश स्वतः विचि्छन हो गए। संदर्भ—आत्मा और परमात्मा उभय एकाकार हो गए।
Padārtha — Word-meaning
सचुपाया=शांति प्राप्त की। ऊपना=उत्पन्न हुआ।