प्रेमाधिक्य के कारण प्रिय का बडी व्यग्रता के साथ आलिगन विध, दोनो शरीर एकाकार हो गए। कबीर कहते हैं जब तक प्रेम तत्व को प्रबलता नही होती हे तब तक दोनो एकाकार केसे हो सकते हे?
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
अंक भरे भरि भेटिया, मन में नाहीं धीर। कहै कबीर ते क्यू मिले,जब लग दोइ सरीर॥
Kabir 4.25
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
ब्रह्म से एकाकार हो कर अभिन्न हो गया।
Padārtha — Word-meaning
अंक = गोद।