संसार मे माया के बहुरंग रूप को देखने के लिए आया था, परन्तु हे सन्त-जन अनुपम तत्व जब से दृष्टिगत हो गाया, तब से माया की समस्त दशाओ को मैं भूल गया।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
आया था संसार में, देषरग कौं बहु रूप। कहै कबीरा संत हौ, पढ़ि गया नजरि अनुप ॥
Kabir 4.24
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
संसार मे माया के विविध रूप देखने के लिए आया था।
Padārtha — Word-meaning
देपरग -देखने के लिए।