सुरति निरति मे प्रविष्ट हो गई, और निरति के साथ मिलकर एकाकार हो गई। सुरति और निरति का परिचय हो जाने के पश्चात् ब्रह्म के रहस्य का द्वार स्वात: उद्घाटित हो गया।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
संदर्भ—मन ब्रह्म से मिलकर एकाकार हो गया। भली भई जु मैं पड्या, गई दशा सय भूलि । पाला गलि पांणी भया, दुलि मिलिया उस कृति॥
Kabir 4.23
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
सुरति और निरति से परिचय होने पर सम्स्त रहस्य स्वत - उदभासित गया।
Padārtha — Word-meaning
स्यम = स्वयं।