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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

संदर्भ—मन ने उन्मनी अवस्था में ब्रह्मानुभूति प्राप्त की। मन लागाउन उन मन सौ, उन मन मनहिं विलग। लूँण बिलगा पाणियाँ, पांणीं लूँ बिलग॥

Kabir 4.22

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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पानी से ही हिम का निर्माण होता है और हिम पुनः घुलकर पानी के रूप में परिवर्तित हो जाता है। इसी प्रकार ब्रह्म से उद्भूत होकर आत्मा ब्रह्मकार हो जाती है। आत्मा और परमात्मा का एकाकार होना अनियर्वाचनीय है

Bhāṣya Commentary

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आत्मा और परमात्मा की एकात्मकता अनिर्वचनीय है।

Padārtha Word-meaning

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पाँणी = पानी।