संसार से उन्मुक्त होकर मन उनमनी अवस्था में पहुँच कर ब्रह्माण्ड में जा पहुँचा। वहाँ पर उसने स्वयं प्रकाश, प्रकाश पुन्ज ब्रह्म के दर्शन किए।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
मन लागा उन मन्न सौं, गगन पहुँचा जाइ। देख्या चंद बिहूँणां, चांदिणाँ, तहाँ अलख निरंजन राइ॥
Kabir 4.21
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
उनमन्न = उन्मन्न। गगन = ब्रह्माण्ड।