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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

प्यंजर प्रेम प्रकासिया, अंतरि भया उजास। मुख कस्तूरी महमहीं, बाँणी फूटी वास॥

Kabir 4.20

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Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

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जब से प्रेम जाग्रत हुआ अन्तस उज्ज्वल हो गया और ब्रह्म रूपी कस्तूरी से सुवासित वाणी प्रस्फुटित हुई।

Bhāṣya Commentary

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के प्रकट होते हो अन्तस उज्ज्वल हो गया और सुन्दर प्रेम से ओत-प्रोत वाणी प्रस्फुटित हुई।

Padārtha Word-meaning

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प्यजर = पिंजर = शरीर। अतरि = हृदय। उजारु = उज्ज्वल। कस्तूरी = कस्तूरी।