शब्द रूपी भाले से आहत प्राणी अब संसार से विलग होकर, पृथक होकर जीवन यापन करता है। वह सद्गुरु के आश्रय में ब्रह्म का स्मरण कर रहा है। वह शीघ्र ही संसार की व्यथाओं से ऊपर उठ जायगा।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
मार्या है जे मरेगा, बिन सर थोथी भालि। पड्या पुकारै ब्रिच्छ तरि, आजि मरै कै काल्हि॥
Kabir 4.2
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
शब्द वाण से आहत प्राणी संसार से विलग होकर जीवन यापन करता है।
Padārtha — Word-meaning
विन सर = बिना शर = फलके के बिना। थोथी = झूठी = कोरी। भालि = भाला। ब्रच्छ = वृक्ष, पेड़।