शरीर मे प्रेम के जाग्रत होते ही अनंत प्रेम,ओर अनन सम्बन्ध प्रकट हो गया इस प्रकार संगम मिट गया और प्रिय से एकात्मकता स्थापित हो गया ।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
सूर समांणां च्ंद् में दहूं किया घर एक। मनफा च्य्ंता तय भया, पछू पूरवला लेख॥
Kabir 4.19
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
प्रेम के जागृत होते ही अनन्त योग जाग्रत हो गया और संगय मिट गया, ब्रह्मा के साथ अभिन्नता स्थापित हो गई।
Padārtha — Word-meaning
पिंजर=घरीर।प्रकासिया=प्रकाघिन घुप्रा।जाग्या=जगा शाघ हुवा।जोग=पोग एगत्मवा। अनंत=प्रमोम। संसा=मयप।मूह=नष्ट हुवा।पियारा=प्यारा=प्रेम।