कबीर कह्ते है कि सतगुरु की कृपा से, सतगुरु द्वारा प्रतिदिन मार्ग पर चलकर घट मे ही ब्र्ह़्म के दर्शन हुए और ब्रह्म मे ही अपनी स्थिति दृष्टि गत हुई।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
घट मांहैं औघट लह्या, औघट माहैं घाट। कहि कबीर परचा भया, गुरू दिखाई बाट॥
Kabir 4.18
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
सतगुरु की कृपा से घट मे हो ब्रह़्म के दर्शन हो गए।
Padārtha — Word-meaning
घत = शरीर। औघट = विचित्र् = ब्र्ह्म। बाट = मार्ग। परचा = परिचय।