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Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

अंतरि कवल प्रक्रासिया, ब्रहा तहाँ होइ। मन भवरा तहां लुबाधिया, जांरौगा जन कोइ॥

Kabir 4.16

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Translations & commentaries(2)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

हृदय मे कमल प्रकशित हो गया और उसमे ब्रह्म का निवास है। मन रूपी भ्रमर उस पर लुब्ध हो गया। विरला ही साधक इस रहस्य हो जान सकेगा।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

अन्तरि = हृदय के अन्तर्गत। कवल = कमल = हृदय पद्म। प्रकाशिया = प्रकाशित हो गया। भवरा = भ्रमर।