पर ब्रह्म के तेज,स्वरूप किस प्रकार का है? यह अकथनीय है,अवर्णनीय है। वह अव्यिंजना से परे है,केवल अनुभव करने योग्य है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
पारब्रह्म के तेज का, कैसा है उसमान। कहिबे कूं सोभा नहीं देखया ही परबान॥
Kabir 4.13
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Translations & commentaries(2)
Sūtra — Translation
Padārtha — Word-meaning
उनमान=अनुमान। कूं=को ।सोम=शोभ=देख्या=देखा, देखने से । परवान=प्रमाण ।