Sant Seva ParishadSant Seva ParishadSSP · sant seva

Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)

कबीर दोहावली

मूल श्लोकः

कौतिक दीठा देह विन, रवि खसि विना उजास। साहिब सेवा माहिं है, बेपरवाही दास॥

Kabir 4.12

Audio
Translations & commentaries(3)

Sūtra Translation

Sūtrahi.wikisource· HI

प्रबुद्ध आत्मा निराकार ब्रह्म के दर्शन किए वह ब्रह्म रवि एवं शशि के प्रकाश के अभाव में भी प्रकाश मान है। वह स्वयंम् प्रकाश है। प्रभु के दर्शन सेवा में रत सेवक को ही प्राप्त होते हैं।

Bhāṣya Commentary

Bhāṣyahi.wikisource· HI

प्रबुद्ध आत्मा ने निराकार ब्रह्म के दर्शन किए। ब्रह्म सेवा, अपनी द्वारा ही प्राप्त किया जा सकता है।

Padārtha Word-meaning

Padārthahi.wikisource· HI

कौतिक = कौतुक = आश्चर्य, ब्रह्म। दीठा = देखा। देवषित = निर्गुण। उजास= उज्ज्वल बेपरवाही = निश्चित।