ब्रह्म का तेज, प्रकाश मान स्वरूप अनन्त है। वह प्रकाश का समूह मानो सूर्य की श्रेणियाँ एक स्थान पर उदित हुई हो, आत्मा रूपी सुन्दरी ने जाग्रत होकर उस वैभव को देखा, प्रकाश नारायण के दर्शन किये।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
कबीर तेज अनंत का मानौं ऊगी सूरज सेखि। पति सँगि जागी सुंदरी, कौतिग दीठा तेणि॥
Kabir 4.11
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
ब्रह्म प्रकाश नारायाण ही, वह निर्मल आत्मा द्वारा ही अनुभव किया जा सकता है।
Padārtha — Word-meaning
अनन्त = ब्रह्म। ऊगी = उगी = विकसित हुई। सूरज = सूर्य। सेणि = श्रेणी। कौतिग= कोतुक = आश्चर्य जनक वस्तु। तेणि = उनके द्वारा।