भव सागर में ज्ञान की अग्नि लग गई और फलतः माया की सहायक तत्व विनष्ट हो गये। कबीर ने चेतन होकर देखा कि मछली शब्द रूपी वृक्ष पर आसीन है।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
समंदर सागी भागि, नदियां जलि कोइला भईं। देन्पि घपिरा जगि मंधी रुपां घदी गई॥
Kabir 4.10
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Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
मवर्गार के अग्नि को शग्नि गयी, माया ये ग्रह पर नष्ट हो गये और इयार कि महिमआ अनुकूल हो गई।
Padārtha — Word-meaning
समदर = समुद्र। कोइला = कोयल = काली। मंछी = मछली। रूपा = वृक्ष। ५. परचा कौ अंग