जीवात्मा ज्ञान की ज्योति से और भक्ति रूपी स्नेह से सम्पन्न हो गया। अब वासना रूपी पतंगे आत्मा जल-जल कर नष्ट होने लगे।
Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
दीपक पावक आँखिया, तेल भी आँण्या संग। तीन्यूँ मिल करि जोइया, (तब) उडि उड़ि पड़े पतंग॥
Kabir 4.1
Audio
Translations & commentaries(3)
Sūtra — Translation
Bhāṣya — Commentary
जब से आत्मा चेतन हो गई, तब से वासनाएँ विनष्ट हो गई।
Padārtha — Word-meaning
दीपक = जीवात्मा। पावक = अग्नि। आंणिया—आनिया = लाया। आण्या = आना = लाया। तेल = स्नेह, प्रेमी। जोइया = आयोजित किया। पतंग = वासना रूपी पतंगे।