Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
काची काया मन अथिर, थिर थिर कर्म करन्त । ज्यों-ज्यों नर निधड़क फिरै, त्यों-त्यों काल हसन्त ॥
Kabir 26.70
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कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
काची काया मन अथिर, थिर थिर कर्म करन्त । ज्यों-ज्यों नर निधड़क फिरै, त्यों-त्यों काल हसन्त ॥
Kabir 26.70
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