Kabir Dohas (Granthavali + Dohavali)
कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
मान नहीं अपमान नहीं, ऐसे शीतल सन्त । भव सागर से पार हैं, तोरे जम के दन्त ॥
Kabir 24.24
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कबीर दोहावली
मूल श्लोकः
मान नहीं अपमान नहीं, ऐसे शीतल सन्त । भव सागर से पार हैं, तोरे जम के दन्त ॥
Kabir 24.24
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